Thursday, 1 February 2018

Highlights of the Union Budget for 2018-19 (Apr-Mar)

Highlights of the Union Budget for 2018-19 (Apr-Mar), presented
by Finance Minister Arun Jaitley in Parliament today:

* Govt has implemented fundamental structural reforms
* India stands out as the fastest growing economy in world
* Promised to reduce poverty, build strong India
* Direct transfer mechanism is a global success story
* Will focus on health, infrastructure, senior citizens
* Focus on 'ease of living' for common man
* To move ahead on ease-of-doing business
* This Budget to consolidate gains of last 4 years' budgets
* Demonetisation has reduced cash in circulation
* Recapitalised banks have better capacity to support growth
* Indirect tax system made simpler with GST
* FDI increased due to govt actions
* Manufacturing sector back on growth path
* There's a premium on honesty because of govt's reforms
* Firmly on course to achieve 8% plus growth
* India to become fifth largest economy very soon
* India a $2.5-trln economy now
* Achieved average 7.5% growth in first 3 years of govt

* FY19 Budget aims to strengthen agri, rural economy
* Seek paradigm shift to double farmers' income by 2022
* Govt committed to welfare of farmers
* Govt to create mechanism for post harvest facilities
* MSP hikes not enough, farmers must be able to get benefits
* Next kharif crop MSP to be at least 1.5 times of cost
* Emphasis on generating gainful farm, non-farm jobs
* Focus on low-cost farming, higher selling price
* Institutional system for farm goods price, demand forecast
* NITI Aayog to make robust system for fair price to farmers
* Export of farm commodities to be liberalised
* Agri export potential $100 bln
* To launch Operation Green in line with Operation Flood
* Allocate 5 bln rupees for Operation Green
* Allocation for food processing sector 14 bln rupees FY19
* Allocate 2 bln rupees for medicinal, aromatic crops
* To encourage women self-help groups for organic farming
* Cluster-based models to be developed for horticulture crops
* e-NAM to be exempt from APMC regulations
* To develop, upgrade 22,000 rural haats to agricultural mkts
* To allocate 20 bln rupees for farm development fund
* Favourable tax treatment for farm mfg organisations
* Agri credit target at 11 trln rupees for FY19
* Kisan credit card benefit also to animal husbandry, fishing
* To launch bamboo mission for 12.9 bln rupees
* 470 APMCs connected to e-NAM, rest to be connected by Mar
* To set up 42 mega food parks for farm exports

* Hope to grow 7.2-7.5% in H2 FY18
* Exports expected to grow 15% in FY18

* 100 bln rupees for animal husbandry, fisheries develop fund
* To set up 2 new funds of total 100 bln rupees for fishery
* Online loan facility for MSMEs to be revamped
* To address bad loan problems of MSMEs
* 37.94 bln rupees for MSME credit support
* Job creation core of policy planning
* To take steps for improving start-up funding environment
* PSUs to be part of e-trade receivables platform
* To link e-trade receivables platform with GSTN
* To review refinancing policies under MUDRA plan
* To give 40 mln power connections under Saubhagya Yojana
* 3 trln rupees lending target for MUDRA plan FY19
* Smart City scheme outlay 2.04 trln rupees

* To set up dedicated affordable housing fund under NHB
* Aim 5.1 mln rural houses under affordable housing plan
* Aim to give houses to all poor by 2022
* Aim to build 20 mln more toilets under Swachh Bharat
* More than 60 mln toilets built under Swachh Bharat plan
* To give 80 mln LPG connections under Ujjwala scheme
* To spend 1 trln rupees on education infra over 4 years
* To subsidise removal of crop residue to tackle pollution
* To set up Ekalavya schools for scheduled tribes
* To treat education holistically pre-nursery to class 12
* To move from blackboard to digital board
* Allocate 99.75 bln rupees for social security plan FY19
* Allocation to Natl Livelihood Mission 57.50 bln rupees
* Allocate 14.3 trln rupees for rural infra FY19
* Allocate 26 bln rupees under ground water irrigation plan
* Health protection scheme to cover 100 mln poor families
* Allocate 12 bln rupees for health wellness centres
* To launch PM research fellow plan for 1,000 BTech students
* To set up 2 new schools of planning & architecture
* 600 mln Jan Dhan accts to get micro insurance benefit
* 24 new medical colleges to be set up via hospital upgrade
* Aim 1 medical college for every 3 Parliament constituency
* 6-bln-rupee nutritional support for Tuberculosis patients
* Govt progressing towards universal health coverage
* Health scheme to have 500,000 rupee/family/yr benefit
* Allocate 566.2 bln rupees for Scheduled Castes welfare
* Cover all poor family in PM insurance plan in mission mode
* 187 projects sanctioned under Ganga cleaning programme
* Allocate 391.35 bln rupees for welfare of Scheduled Tribes
* Govt women employees to contribute 8% to EPF in first 3 yrs

* Special scheme to fight pollution in Delhi-NCR
* To develop 10 places as iconic tourism destinations
* To construct tunnel under Sela Pass

* To allocate 71.5 bln rupees to textiles sector FY19

Wednesday, 27 December 2017


1. वायरस जनित रोग समूह है? 

-इन्फ्लुएंजा तथा डेंगू बुखार 

2.श्वसन का मुख्य उद्देश्य है? 

-ग्लूकोजके जारण से ऊर्जा उत्पन्न करना। 

3.निम्न में से कौन-सा मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है? -शुक्रवाहिका

4.आयोडीन की कमी से होने वाला रोग है? -घेंघा

5.ध्वनि की चाल निम्न में से किसमें अधिकतम होती है? -लोहेमें 

6.सड़क पर जा रही मोटरकार की गति किस प्रकार की होती है? -रेखीयगति 

7.ठोसों में ऊष्मा का स्थानांनतरण होता है? -चालनद्वारा 

8.एक समतल दर्पण की फोकस दूरी होती है? -अनन्त

9.ऊर्जा का मात्रक है? -वॉटसैकंड 

10.कम्प्यूटर का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है? -सी.पी. यू. 

11.तारों सूर्य की ऊर्जा का स्त्रोत है? 


12.प्रेशर कुकरों के हैण्डल में कौन-सा प्लास्टिक प्रयुक्त होता है जो कि प्रथम मानव निर्मित प्लास्टिक है? 


13.वे प्लास्टिक जो गरम करने पर आसानी से मृदुल हो जाते हैं और ठंडा करने पर कठोर हो जाते हैं, कहलाते हैं? -तापसुनम्य 

14.शरीर के आन्तरिक अंगों गर्भस्थ भु्रण के स्वास्थ्य की जाँच की जाती है? -अल्ट्रासाउण्ड 

विशेषज्ञ : सुरेंद्र भारती (अभिप्राय), जयपुर 

{ 26 नवम्बर, 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया। 

{ उद्देशिका में केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संशोधन कर 3 नये शब्द ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जोड़े गए। 

{ संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12-35 तक मूल अधिकारों का उल्लेख किया गया है। 

{ संविधान ने मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट/ लेख जारी करने की शक्ति उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय को दी है। अनुच्छेद 32 के तहत ये शक्ति उच्चतम न्यायालय को एवं अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को ये शक्ति दी गई है। 

{ मूल अधिकारों से भिन्न राज्य के नीति निदेशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। नीति निदेशक तत्त्वों का उल्लेख संविधान के भाग चार में अनुच्छेद 36-51 तक किया गया है। 

{ मूल कर्तव्यों का उल्लेख मूल संविधान में नहीं था। इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भाग-4क में अनुच्छेद 51क के तहत 10 मूल कर्त्तव्य जोड़े गए। 

{ 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत 11वां मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया जिसमें अभिभावकों या बच्चों के संरक्षकों का यह कर्त्तव्य है कि वे आश्रित बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेंगे। 

{ अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत का एक राष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। इसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारी के द्वारा करेगा। 

{ राष्ट्रपति पद के लिए 50 प्रस्तावक तथा 50 अनुमोदक अलग अलग होने चाहिए। प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए 15,000 रुपये जमानत के रूप में जमा करवाने पड़ते हैं। 

{ भारत का राष्ट्रपति अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुना जाता है। राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति से किया जाता है। 

{ राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न विवादों की जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है एवं उसका निर्णय अंतिम होगा। 

{ अनुच्छेद 61 के अनुसार राष्ट्रपति पर महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन द्वारा लगाया जा सकता है। 

{ रामनाथ कोविंद को 20 जुलाई, 2017 को भारत का नया राष्ट्रपति चुना गया। वे देश के 14वें राष्ट्रपति हैं। 25 जुलाई, 2017 को राष्ट्रपति भवन में देश के मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर ने उन्हें शपथ दिलवाई। 

{ संघ सूची के विषयों पर कानून बनाने की अनन्य शक्ति केन्द्र के पास होती है। इसमें कुल 97 प्रविष्टियां थी, जो संशोधनों के बाद 100 हो गई। 

{ राज्य सूची के विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून बनाता है। इस सूची में मूलत: 66 प्रविष्टियां थी, किंतु 7वें तथा 42वें संशोधन के बाद इसमेें अब 61 प्रविष्टियां शेष हैं। 

{ समवर्ती सूची पर कानून बनाने का अधिकार संसद तथा राज्य विधान मण्डल दोनों को है किंतु गतिरोध की स्थिति में संसद का कानून ही मान्य होगा। मूल रूप से इसमें 47 प्रविष्टियां थी, किंतु वर्तमान में इस सूची में 52 प्रविष्टियां हैं। 

{ अनुच्छेद 79 के अनुसार भारतीय संसद लोकसभा, राज्यसभा तथा राष्ट्रपति से मिलकर बनती है। 

{ अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा के अधिकतम सदस्य 250 (238 निर्वाचित, 12 मनोनीत) हो सकते हैं। वर्तमान में सदस्य 245 (233 निर्वाचित, 12 मनोनीत) है। 

{ अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 (530 राज्यों के प्रतिनिधि, 20 केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, 2 आंग्ल भारतीय सदस्यों का मनोनयन राष्ट्रपति द्वारा) हो सकती है। वर्तमान सदस्य संख्या 545 (530 राज्यों से, 13 संघ राज्य क्षेत्रों से, 2 मनोनीत) है। विशेषज्ञ: बीएल रैवाड़, सीकर 

Monday, 18 December 2017

मौर्य वंश से जुडी भ्रांतियों का तर्कपूर्ण खण्डन

मौर्य वंश से जुडी भ्रांतियों का तर्कपूर्ण खण्डन
मौर्यो के रघुवंशी क्षत्रिय होने के प्रमाण——–

महात्मा बुध का वंश शाक्य गौतम वंश था जो सूर्यवंशी क्षत्रिय थे।कौशल नरेश प्रसेनजित के पुत्र विभग्ग ने शाक्य क्षत्रियो पर हमला किया उसके
बाद इनकी एक शाखा पिप्लिवन में जाकर रहने लगी। वहां मोर पक्षी की अधिकता के कारण मोरिय कहलाने लगी।

बौद्ध रचनाओं में कहा गया है कि ‘नंदिन’(नंदवंश) के कुल का कोई पता नहीं चलता (अनात कुल) और चंद्रगुप्त को असंदिग्ध रूप से अभिजात कुल का बताया गया है।

चंद्रगुप्त के बारे में कहा गया है कि वह मोरिय नामक क्षत्रिय जाति की संतान था; मोरिय जाति शाक्यों की उस उच्च तथा पवित्र जाति की एक शाखा थी, जिसमें महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। कथा के अनुसार, जब अत्याचारी कोसल नरेश विडूडभ ने शाक्यों पर आक्रमण किया तब मोरिय अपनी मूल बिरादरी से अलग हो गए और उन्होंने हिमालय के एक सुरक्षित स्थान में जाकर शरण ली। यह प्रदेश मोरों के लिए प्रसिद्ध था, जिस कारण वहाँ आकर बस जाने वाले ये लोग मोरिय कहलाने लगे, जिनका अर्थ है मोरों के स्थान के निवासी। मोरिय शब्द ‘मोर’ से निकला है, जो संस्कृत के मयूर शब्द का पालि पर्याय है।

एक और कहानी भी है जिसमें मोरिय नगर नामक एक स्थान का उल्लेख मिलता है। इस शहर का नाम मोरिय नगर इसलिए रखा गया था कि वहाँ की इमारतें मोर की गर्दन के रंग की ईंटों की बनी हुई थीं। जिन शाक्य गौतम क्षत्रियों ने इस नगर का निर्माण किया था, वे मोरिय कहलाए।

महाबोधिवंस में कहा गया है कि ‘कुमार’ चंद्रगुप्त, जिसका जन्म राजाओं के कुल में हुआ था (नरिंद-कुलसंभव), जो मोरिय नगर का निवासी था, जिसका निर्माण साक्यपुत्तों ने किया था, चाणक्य नामक ब्राह्मण (द्विज) की सहायता से पाटलिपुत्र का राजा बना।
महाबोधिवंस में यह भी कहा गया है कि ‘चंद्रगुप्त का जन्म क्षत्रियों के मोरिय नामक वंश में’ हुआ था (मोरियनं खत्तियनं वंसे जातं)। बौद्धों के दीघ निकाय नामक ग्रन्थ में पिप्पलिवन में रहने वाले मोरिय नामक एक क्षत्रिय वंश का उल्लेख मिलता है। दिव्यावदान में बिन्दुसार (चंद्रगुप्त के पुत्र) के बारे में कहा गया है कि उसका क्षत्रिय राजा के रूप में विधिवत अभिषेक हुआ था (क्षत्रिय-मूर्धाभिषिक्त) और अशोक (चंद्रगुप्त के पौत्र) को क्षत्रिय कहा गया है।

मौर्यो के 1000 हजार साल बाद विशाखदत्त ने मुद्राराक्षस ग्रन्थ लिखा।जिसमे चन्द्रगुप्त को वृषल लिखा।
वर्षल का अर्थ आज तक कोई सही सही नही बता पाया पर हो सकता है जो अभिजात्य न हो।
चन्द्रगुप्त क्षत्रिय था पर अभिजात्य नही था एक छोटे से गांव के मुखिया का पुत्र था।
अब इस ग्रन्थ को लिखने के भी 700 साल बाद यानि अब से सिर्फ 300 साल पहले किसी ढुंढिराज ने इस पर एक टीका लिखी जिसमे मनगढंत कहानी लिखी।

जबकि हजारो साल पुराने भविष्य पुराण में लिखा है कि मौर्यो ने विष्णुगुप्त ब्राह्मण की मदद से नन्दवंशयो का शासन समाप्त कर पुन क्षत्रियो की प्रतिष्ठा स्थापित की।

दो हजार साल पुराने बौद्ध और जैन ग्रन्थ और पुराण जो पण्डो ने लिखे उन सबमे मौर्यो को क्षत्रिय लिखा है।
1300 साल पुराने जैन ग्रन्थ कुमारपाल प्रबन्ध में चित्रांगद मौर्य को रघुवंशी क्षत्रिय लिखा है।

महापरिनिव्वानसुत में लिखा है कि महात्मा बुद्ध के देहावसान के समय सबसे बाद मे पिप्पलिवन के मौर्य आए ,उन्होंने भी खुद को शाक्य वंशी गौतम क्षत्रिय बताकर बुद्ध के शरीर के अवशेष मांगे,

एक पुराण के अनुसार इच्छवाकु वंशी मान्धाता के अनुज मांधात्री से मौर्य वंश की उतपत्ति हुई है।

इतने प्रमाण होने और आज भी राजपूतो में मौर्य वंश का प्रचलन होने के बावजूद सिर्फ 200-300 साल पुराने ग्रन्थ के आधार पर कुछ लोग मौर्यो को क्षत्रिय नही घोषित कर देते हैं।

ये वो हैं जिन्हें सही इतिहास की जानकारी नही है

हर ऑथेंटिक पुराण में मौर्य को क्षत्रिय सत्ता दोबारा स्थापित करने वाला वंश लिखा है
वायु पुराण विष्णु पुराण भागवत पुराण मत्स्य पुराण सबमें मौर्य वंश को सूर्यवँशी क्षत्रिय लिखा है।।

मत्स्य पुराण के अध्याय 272 में यह कहा गया है की दस मौर्य भारत पर शासन करेंगे और जिनकी जगह शुंगों द्वारा ली जाएगी और शतधन्व इन दस में से पहला मौरिया(मौर्य) होगा।
विष्णु पुराण की पुस्तक चार, अध्याय 4 में यह कहा गया है की “सूर्य वंश में मरू नाम का एक राजा था जो अपनी योग साधना की शक्ति से अभी तक हिमालय में एक कलाप नाम के गाँव में रह रहा होगा” और जो “भविष्य में क्षत्रिय जाती की सूर्य वंश में पुनर्स्थापना करने वाला होगा” मतलब कई हजारो वर्ष बाद।

इसी पुराण के एक दुसरे भाग पुस्तक चार, अध्याय 24 में यह कहा गया है की “नन्द वंश की समाप्ति के बाद मौर्यो का पृथ्वी पर अधिकार होगा, क्योंकि कौटिल्य राजगद्दी पर चन्द्रगुप्त को बैठाएगा।”

कर्नल टॉड मोरया या मौर्या को मोरी का विकृत रूप मानते थे जो वर्तमान में एक राजपूत वंश का नाम है।

महावंश पर लिखी गई एक टीका के अनुसार मोरी नगर के क्षत्रिय राजकुमारों को मौर्या कहा गया।

संस्कृत के विद्वान् वाचस्पति के कलाप गाँव को हिमालय के उत्तर में होना मानते हैं-मतलब तिब्बत में। ये ही बात भागवत के अध्याय 12 में भी कही गई है. “वायु पुराण यह कहते हुए प्रतीत होता है की वो(मारू) आने वाले उन्नीसवें युग में क्षत्रियो की पुनर्स्थापना करेगा।”
(खण्ड 3, पृष्ठ 325) विष्णु पुराण की पुस्तक तीन के अध्याय छः में एक कूथुमि नाम के ऋषि का वर्णन है।

गुहिल वंश के बाप्पा रावल के मामा चित्तौड़ के राजा मान मौर्य थे।
चित्तौड की स्थापना चित्रांगद मौर्य ने की थी।
कुमारपाल प्रबन्ध में 36 क्षत्रिय वंशो की सूची में मौर्य वंश का भी नाम है
गुजरात के जैन कवि ने चित्रांगद मौर्य को रघुवंशी लिखा था 7 वी सदी में।।

मौर्यो ने पुरे भारत और मध्य एशिया तक पर राज किया।दूसरे वंशो के राज्य उनके सामने बहुत छोटे हैं
कोई 100 गांव की स्टेट कोई 500 गांव की स्टेट वो सब मशहूर हो गए।
चन्द्रगुप्त मौर्य का जीवन—–

चन्द्रगुप्त मोरिय के पिता
पिप्लिवंन के सरदार थे जो मगध के राजा नन्द के हमले में मारे गये।
ब्राह्मण चाणक्य का नन्द राजा ने अपमान किया जिसके बाद चाणक्य ने देश को शूद्र राजा के चंगुल से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। एक दिन
चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को देखा तो उसके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान
गया। उसने च्न्द्र्गुप्र के वंश का पता कर उसकी माँ से शिक्षा देने के लिए
चन्द्रगुप्त को अपने साथ लिया। फिर वो उसे तक्षिला ले गया जहाँ
चन्द्रगुप्त को शिक्षा दी गयी।

उसी समय यूनानी राजा सिकन्दर ने भारत
पर हमला किया।
चन्द्रगुप्त और चानक्य ने पर्वतीय राजा पर्वतक से मिलकर नन्द राजा पर
हमला कर उसे मारकर देश को मुक्ति दिलाई। साथ ही साथ
यूनानी सेना को भी मार भगाया। उसके बाद बिन्दुसार और अशोक राजा
हुए। सम्राट अशोक बौध बन गया।

अशोक के कई पुत्र हुए जिनमे महेंद्र कुनाल,जालोंक दशरथ थे
जलोक को कश्मीर मिला,दशरथ को मगध की गद्दी मिली।
कुणाल के पुत्र सम्प्रति को
पश्चिमी और मध्य भारत यानि आज का गुजरात राजस्थान मध्य प्रदेश
आदि मिला।
सम्प्रति जैन बन गया उसके बनाये मन्दिर आज भी राजस्थान में मिलते हैं, सम्प्रति के के वंशज आज के मेवाड़ उज्जैन इलाके में राज करते रहे।

पश्चिम भारत के मौर्य क्षत्रिय राजपूत माने गये। चित्तौड पर इनके राजाओ के नाम महेश्वर भीम
भोज धवल और मान थे।

मौर्य और राजस्थान——–
राजस्थान के कुछ भाग मौर्यों के अधीन या प्रभाव
क्षत्र में थे। अशोक का बैराठ का शिलालेख
तथा उसके उत्तराधिकारी कुणाल के पुत्र
सम्प्रति द्वारा बनवाये गये मन्दिर मौर्यां के
प्रभाव की पुश्टि करते हैं। कुमारपाल प्रबन्ध
तथा अन्य जैन ग्रंथां से अनुमानित है कि चित्तौड़
का किला व चित्रांग तालाब मौर्य राजा चित्रांग
का बनवाया हुआ है। चित्तौड़ से कुछ दूर
मानसरोवर नामक तालाब पर राज मान का,
जो मौर्यवशी माना जाता है, वि. सं. 770
का शिलालेख कर्नल टॉड को मिला, जिसमें
माहेश्वर, भीम, भोज और मान ये चार नाम
क्रमशः दिये हैं। कोटा के निकट कणसवा (कसुंआ)
के शिवालय से 795 वि. सं. का शिलालेख
मिला है, जिसमें मौर्यवंशी राजा धवल का नाम है।
इन प्रमाणां से मौर्यों का राजस्थान में अधिकार
और प्रभाव स्पष्ट हाता है।
चित्तौड़ के ही एक और मौर्य शासक धरणीवराह का भी नाम मिलता है

शेखावत गहलौत राठौड़ से पहले शेखावाटी क्षेत्र और मेवाड़ पर मौर्यो की सत्ता थी।शेखावाटी से मौर्यो ने यौधेय जोहिया राजपूतों को हटाकर जांगल देश की ओर विस्थापित कर दिया था।
पृथ्वीराज रासो में पृथ्वीराज चौहान के सामन्तों में भीम मौर्य और सारण मौर्य मालंदराय मौर्य और मुकुन्दराय मौर्य का भी नाम आता है।
ये मौर्य सम्राट अशोक के पुत्र सम्प्रति के वंशज थे।मौर्य वंश का ऋषि गोत्र भी गौतम है।

गहलौत वंशी बाप्पा रावल के मामा चित्तौड के मान मौर्य थे, बाप्पा रावल ने मान मौर्य से चित्तौड का किला जीत
लिया और उसे अपनी राजधानी बनाया।

इसके बाद मौर्यों की एक शाखा
दक्षिण भारत चली गयी और मराठा राजपूतो में मिल गयी जिन्हें आज मोरे मराठा कहा जाता है वहां इनके कई राज्य थे। आज भी मराठो में मोरे वंश उच्च कुल माना जाता है।

खानदेश में मौर्यों का एक लेख मिला है…जो ११ वी शताब्दी का है।जिसमे उल्लेख है के ये मौर्य काठियावाड से यहाँ आये….! एपिग्रफिया इंडिका,वॉल्यूम २,पृष्ठ क्रमांक २२१….सदर लेख वाघली ग्राम,चालीसगांव तहसील से मिला है….

एक शाखा उड़ीसा चली गयी ।वहां के राजा धरणीवराह के वंशज रंक उदावाराह के प्राचीन लेख में उन्होंने सातवी सदी में चित्तौड या चित्रकूट से आना लिखा है।

कुछ मोरी या मौर्य वंशी
राजपूत आज भी आगरा मथुरा निमाड़ मालवा उज्जैन में मिलते हैं। इनका गोत्र गौतम है। बुद्ध का गौत्र भी गौतम था जो इस बात का प्रमाण है कि मौर्य
और गौतम वंश एक ही वंश की दो शाखाएँ हैं,
मौर्य और परमार वंश का सम्बन्ध—–

13 वी सदी में मेरुतुंग ने स्थिरावली की रचना की थी
जिसमे उज्जैन के सम्राट गंधर्वसेन को जो विक्रमादित्य परमार के पिता थे उन्हें मौर्य सम्राट सम्प्रति का पौत्र लिखा था।
जिन चित्तौड़ के मौर्यो को भाट ग्रंथो में मोरी लिखा है वहां मोरी को परमार की शाखा लिख दिया।जबकि परमार नाम बहुत बाद में आया।उन्ही को समकालीन विद्वान रघुवंशी मौर्य लिखते है।
उज्जैन अवन्ति मरुभूमि तक सम्प्रति का पुरे मालवा और पश्चिम भारत पर राज था जो उसके हिस्से में आया था।इसकी राजधानी उज्जैन थी।इसी उज्जैन में स्थिरावली के अनुसार सम्प्रति मौर्य के पौत्र के पुत्र विक्रमादित्य ने राज किया जिन्हें भाट ग्रंथो में परमार लिखा गया।

परमार राजपूतो की उत्पत्ति अग्नि वंश से मानी जाती है परन्तु अग्नि से किसी की उत्पत्ति नही होती है. राजस्थान के जाने माने विद्वान सुरजन सिंंह झाझड, हरनाम सिंह चौहान के अनुसार परमार राजवंश मौर्य वंश की शाखा है.इतिहासकार गौरीशंकर ओझा के अनुसार सम्राट अशोक के बाद मौर्यो की एक शाखा का मालवा पर शासन था. भविष्य पुराण मे भी इसा पुर्व मे मालवा पर परमारो के शासन का उल्लेख मिलता है.

“राजपूत शाखाओ का इतिहास ” पेज # २७० पर देवी सिंंह मंडावा महत्वपूर्न सूचना देते है. लिखते है कि विक्रमादित्य के समय शको ने भारत पर हमला किया तथा विक्रमादित्य न उन्हेे भारत से बाहर खदेडा. विक्रमादित्य के वंशजो ने ई ५५० तक मालवा पर शासन किया. इन्ही की एक शाखा ने ६ वी सदी मे गढवाल चला गया और वहा परमार वंश की स्थापना की.

अब सवाल उठता है कि विक्रमादित्य किस वंश से थे? कर्नल जेम्स टाड के अनुसार भारत के इतिहास मे दो विक्रमादित्य आते है. पहला मौर्यवंशी विक्रमादित्य जिन्होने विक्रम संवत की सुरुआत की. दूसरा गुप्त वंश का चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य जो एक उपाधि थी..

मिस्टर मार्सेन ने “ग्राम आफ सर्वे “मे लिखा है कि शत्धनुष मौर्य के वंश मे महेन्द्रादित्य का जन्म हुआ और उसी का पुत्र विक्रमादित्य हुआ..

कर्नल जेम्स टाड पेज # ५४ पर लिखते है कि मौर्य तक्षक वंशी थे जो बाद मे परमार राजपूत कहलाये. अत: स्पष्ट हो जाता है कि परमार वंश मौर्य वंश की ही शाखा है.

कालीदास , अमरिसंह , वराहमिहिर,धनवंतरी, वररुिच , शकु आदि नवरत्न विक्रमाद्वित्य के दरबार को सुशोभित करते थे तथा इसी राजवंश मे जगत प्रिसद्ध राजा भोज का जन्म हुआ.

इसी आधार पर मौर्य और परमार को एक मानने के प्रमाण हैं।
अधिकतर पश्चिम भारत के मौर्य परमार कहलाने लगे और छोटी सी शाखा बाद तक मोरी मौर्य राजपूत कहलाई जाती रही और भाट इन्हें परमार की शाखा कहने लगे जबकि वास्तव में उल्टा हो सकता है।
कर्नल जेम्स टॉड ने भी चन्द्रगुप्त मौर्य को
परमार वंश से लिखा है।

चन्द्रगुप्त के समय के सभी जैन और बौध धर्म मौर्यों को शुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय प्रमाणित करते है ।चित्तौड के मौर्य राजपूतो को पांचवी सदी में
सूर्यवंशी ही माना जाता था
मौर्य वंश आज राजपूतो में कहाँ गायब हो गया??????

मौर्य वंश अशोक के पोत्रो के समय दो भागो में बंट गया।
पश्चिमी भाग सम्प्रति मौर्य के हिस्से में आया।वो जैन बन गया था।उसकी राजधानी उज्जैन थी।उसके वंशजो ने लम्बे समय तक मालवा और राजस्थान में राज किया।

पूर्वी भाग के राजा बौद्ध बने रहे और पुष्यमित्र शुंग द्वारा मारे गए।

पश्चिमी भारत के मौर्य परमार राजपूतो के नाम से प्रसिद्ध हुए।

इनकी चित्तौड़ शाखा मौर्य ही कहलाती रही।
चित्तौड़ शाखा के ही वंश भाई सिंध के भी राजा थे।उनका नाम साहसी राय मौर्य था जिन्हें मारकर चच ब्राह्मण ने सिंध पर राज किया तब उनके रिश्ते के भाई चित्तौड़ से वहां चच ब्राह्मण से लड़ने गए थे जिसका जिक्र 8 वी सदी में लिखी चचनामा में मिलता है।

जब बापा रावल ने मान मोरी को हराकर चित्तौड़ से निकाल दिया तो यहाँ के मौर्य मोरी राजपूत इधर उधर बिखर गए—-

1-एक शाखा रंक उदवराह के नेतृत्व में उड़ीसा चली गयी।वहां के अधिकतर सूर्यवँशी आज उसी के वंशज होने का दावा करते हैं।

2-एक शाखा हिमाचल प्रदेश गयी और चम्बा में भरमोर रियासत की स्थापना की।इनके लेख में इन्हे 5 वी सदी के पास चित्तौड़ से आना लिखा है।ये स्टेट आज भी मौजूद है और इनके राजा को सूर्यवँशी कहा जाता है।इस शाखा के राजपूत अब चाम्बियाल राजपूत कहलाते हैं

3-एक शाखा मालवा की और पहले से थी और आज भी निमाड़ उज्जैन और कई जिलो में शुद्ध मौर्य राजपूत मिलते हैं।
एक शाखा आगरा के पास 24 गाँव में है और शुद्ध मोरी राजपूत कहलाती है।
इस राठौर राजपूत ठिकाने की लड़की मौर्य राजपूत ठिकाने में ब्याही है

4-एक शाखा महाराष्ट्र चली गयी।उनमे खानदेश में आज भी मौर्य राजपूत हैं जबकि कुछ मराठा बन गए और मोरे मराठा कहलाते हैं।

5-एक शाखा गुजरात चली गयी और जमीन राज्य न रहने से राजपूतो में मिल गयी और कार्डिया कहलाती है।

वास्तव में मौर्य अथवा मोरी वंश एक शुद्ध सूर्यवंशी क्षत्रिय राजपूत वंश है जो आज भी राजपूत समाज का अभिन्न अंग है।
मौर्य मोरी वंश के गोत्र प्रवर आदि—
गोत्र–गौतम और कश्यप
प्रवर तीन–गौतम वशिष्ठ ब्राह्स्पत्य
गद्दी–कश्मीर,पाटिलिपुत्र, चित्तौड़, उज्जैनी,भरमौर, सिंध,
निवास–आगरा, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, उज्जैन, निमाड़, हरदा,इंदौर, खानदेश महाराष्ट्र ,तेलंगाना, गुजरात(karadiya में),हिमाचल प्रदेश,मेवाड़
सांस्कृतिक रिवाज–शुभ कार्यो में मोर पंख रखते हैं।